शेयर बाजार के नियम

शेयर बाजार के नियम

शेयर बाजार के नियम

दोस्तों आज हम स्टॉक मार्केट के बेहद महत्वपूर्ण नए नियमों के बारेंमे बात करने वाले है जोकि Margin और शेयर प्लेजमेंट (गिरवी) हैं जिसे SEBI के द्वारा लागु किया गया हैं, यह New Rules क्या हैं, स्टॉक मार्केट में कैसे काम करता है और शेयर बाजार से जुड़े सभी को इसका क्या इम्पैक्ट (असर) पड़ा है, इन जैसे सभी सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल (शेयर बाजार के नियम) के माध्यम से समजने को मिलेंगे तो चलिए इन नए रूल्स को विस्तार से समजते हैं

स्टॉक मार्केट के नए नियम क्या हैं :-

पहले सेबी ने मार्जिन के नये नियमों को 1 अगस्त 2020 को लागु किया जाने वाला था मगर उस समय इसके बारेंमे किसी ब्रोकर के पास पूर्ण इन्फोर्मेशन नहीं थी और इस नये नियम को समजने के लिए ब्रोकरों को कुछ समय की आवश्यकता थी

इस वजह से सेबी ने इस की तारीख को बढ़ा कर 1 सितम्बर 2020 कर दिया जिसमे शेयरों पर ट्रेडिंग करने के लिए इनिशियल मार्जिन को शुरु कर दिया गया है और ओपसन के तौर पर शेयर प्लेजमेंट (गिरवी) को दिया गया है

शेयर मार्जिन और शेयर प्लेजमेंट (गिरवी) इन दोनों का अलग आर्टिकल आपको SEBI New Rules की केटेगरी में मिल जायेंगे

यह आर्टिकल्स उन सभी निवेशकों के लिये है जो शेयर बाजार में अच्छाखासा निवेश करते है यानि शेयर बाजार में नये और पुराने सभी निवेशकों के लिए है क्योंकि यह सेबी के द्वारा जारी किया जाने वाला नया नियम है तो चलिए इसे पूर्ण विस्तार से समजते हैं

Margin Rules

तो चलिए दोस्तों सेबी के द्वारा लाया गया यह मार्जिन नियम क्या हैं और इनसे जुडी सभी महत्वपूर्ण बातोँ का जिक्र इस टोपिक में किया गया हैं तो चलिए इसे विस्तारपूर्वक समझते हैं

स्टॉक मार्केट का मार्जिन नियम क्या हैं और यह कैसे काम करता हैं

Margin का न्यू रूल्स क्या हैं और इसके अनुसार हम स्टॉक मार्केट में आगे की ट्रेडिंग कैसे कर सकेंगे इन सभी बातोँ को समजते हैं 

यदि हम पहले जैसे ही आगे भी शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो हमें इन नए नियमों को ज़रूर समजना होंगा इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है

‘मार्जिन’ यानि सेबी के द्वारा इस नये नियम के तहत शेयर मार्केट में सभी लिस्टेड कंपनीयों को अपने रोजाना मार्केट के कारोबार और उसके परफोर्मेंस के हिसाब से एक Margin % दिया जाता है

इसका यह मतलब है की उस कंपनी के शेयर को खरीदने और बेचने के लिये अग्रिम मार्जिन जमा करवाना अनिवार्य होंगा यानि उतने प्रतिशत (%) रकम हमारे Trading Account में क्रेडिट (जमा) होनी चाहिए तभी हम उसके मुताबिक शेयरों को खरीद और बेच सकते है

यानि हमारे ब्रोकर की तरफ़ से हमें हमारे खाते में सिर्फ उतनी ही लिमिट मिलती है जितनी की हमारे Trading Account में बैलेंस जमा हो और एक खास बात की सभी लिस्टेड कंपनीयों में अलग – अलग मार्जिन होता है और रोजाना उसमे बदलाव भी होता है

सेबी के द्वारा जारी किया जाने वाला यह शेयर मार्जिन का जो नियम है वो बेहद ही सख्त और जवाबदारीपुर्ण है इस नियम के उलंघन के स्वरूप सेबी ने पेनल्टी स्वरूप कही चार्ज लगाये है

जोकि यह चार्जिस ब्रोकर्स और निवेशकों दोनोपर ही लागु होते है जिनसे इन नियमों के पालन का कार्यभार ब्रोकर और निवेशक दोनों पर एकसमान रहेंगा  

मार्जिन नियम से ब्रोकर्स पर क्या प्रभाव पड़ा हैं

इस नये नियम से अगर किसीको ज्यादा फर्क पड़ा है तो वो ब्रोकर्स है में यह नहीं कहूगा की इनसे सभी ब्रोकरों को फर्क पड़ा है क्यूंकि बड़े – बड़े ब्रोकर्स पहलें से ही इस नियम से कार्य कर रहे है

यानि में Angel Broking, Sharekhan, Motilal Oswal और Zerodha जैसे बड़े ब्रोकर्स की बात कर रहा हु जिसकी पुरे देश में कही सारी ब्रांचे है जिनसे उन्होंने पहले से ही ऐडवांस पेमेंट पर ट्रेडिंग की सेवाएँ मुहैया करवाते है 

हमारे देश में कही सारे ऐसे भी ब्रोकर्स है जिन्हें इस नियम को समजने में काफी सारी चुनोतीयों का सामना किया है क्यूंकि छोटे – छोटे सामान्य ब्रोकर्स पहले से ही अपने निवेशकों को शेयर खरीदने के लिये बिना जमा राशी के ट्रेडिंग करने देते है

ऐसा इस लिए क्योंकि ऐसे ब्रोकर्स के पास लिमिटेड क्लाइंट्स होते है और उन्हें अपने पास बनाये रखने के लिए उसे इंट्राडे ट्रेडिंग और डिलीवरी ट्रेडिंग में कुछ छुट छात देनी पड़ती है

जिनसे उन्हें भी ज्यादा ब्रोकरेज का लाभ मिल सके मगर सेबी के इस नये मार्जिन नियम के तहत इंट्राडे ट्रेडिंग में काफी गिरावट देखने को मिली है       

सेबी ने यह नियम जरुर कुछ सोच-समज कर ही लागु किए होंगे मेने आगे एक बात कही थी की छोटे सामान्य ब्रोकर्स अपने क्लाइंट को सँभालने के लिए उसे अपने फंड से शेयरों की खरीदी करवाते है

यह नियम (रूल) आने से पहले भी ब्रोकर्स के लिए तो यह नियम लागु ही था की अगर किसी निवेशक को किसी कंपनी के शेयर पर अगर Rs.10,000 के रकम की खरीदी के लिए सिर्फ लिमिट डालनी हो तो उस ब्रोकर को उस लिमिट के कुछ प्रतिशत रकम सेबी में जमा करवानी पड़ती थी

उदाहरण

इसे एक उदाहरण से समजते है अगर मुझे अपने ब्रोकर के पास Reliance को 2000 के भाव से 10 शेयर खरीदने की लिमिट रखवानी है

तो भले ही मेरा Trading Account Nill (ज़ीरो) हो फिरभी मेरे ब्रोकर को तो मेरी लिमिट का कुछ प्रतिशत मार्जिन सेबी में जमा करवाना पड़ता है

तभी वह लिमिट सबमिट होती थी इस हिसाब से देखेतो ऐसे ब्रोकर्स भी सेफ हो चुके है मगर फिरभी इस नियम से अगर किसी को सबसे ज्यादा फर्क पड़ा है तो वो छोटे ब्रोकर्स है

मार्जिन नियम से निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ा हैं

सेबी के इन न्यू रूल्स की वजह से न केवल ब्रोकर्स को बल्कि एक सामान्य निवेशक को भी उतना ही प्रभाव पड़ा है जितना की रोजाना ट्रेडिंग करनेवाले ट्रेडर्स को पड़ा हैं

मार्जिन नियमों के पहले की ट्रेडिंग प्रक्रिया

निवेशकों के शेयर ट्रेडिंग में क्या चेंजीस हुए है वो समजने से पहले हमें यह समजना अनिवार्य है की सेबी के इस नये मार्जिन नियमों के पहले शेयरहोल्डर कैसे ट्रेडिंग करते थे

तो पेहले ऐडवांस मार्जिन अपने Trading Account में जमा रखना जरुरी नहीं था क्यूंकि सभी ब्रोकर्स अपने – अपने क्लाइंट्स को अच्छी तरह जानते ही है उन्हें अच्छी तरह पता है की बिना मार्जिन के किनके शेयर्स खरीदने और किनके नहीं

फिर चाहे वो इंट्राडे का सौदा हो या फिर डिलीवरी का अगर किसी क्लाइंट को इंट्राडे ट्रेडिंग करनी है तो दिन के बाजार बंद होने के साथ ही सब स्क्वेरअप हो जाता है फिर तो सिर्फ प्रॉफिट या लोस ही गिना जाता है जो शाम को बिल बनते ही पता चल जाता है

मगर किसी क्लाइंट को डिलीवरी ट्रेडिंग करनी है यानि ख़रीदे गए शेयर को उसी दिन ना बेच कर तिन दिन, महीना या साल फिर कभी भी बेचे उसे डिलीवरी ट्रेडिंग कहते है

ऐसी ट्रेडिंग में दुसरे दिन या फिर अपने – अपने ब्रोकर के मुताबिक अपने उधार को क्लियर करते थे खेर ये तो हुई पुरानी बाते अब देखते है हालमे इस मार्जिन रूल (नियम) से निवेशकों में क्या परिवर्तन देखने मिले है

मार्जिन नियमों के बाद की ट्रेडिंग प्रक्रिया

न्यू मार्जिन रूल के मुताबिक अगर किसी क्लाइंट को इंट्राडे ट्रेडिंग करनी है तो पहले तो यह नक्की करना है की बाजार के पुरे दिन में कितनें रकम का इंट्राडे ट्रेडिंग करेंगे उसके बाद किन – किन शेयर्स में ट्रेडिंग करेंगे

मानलीजिये की एक कंपनी के शेयर में ट्रेडिंग करेंगे तो उस शेयर पर उस दिन का क्या मार्जिन है और आखिर में अगर Trading Account Nill है तो उस मार्जिन के मुताबिक इंट्राडे (खरीदी और बिक्री) में दोने के हिसाब से अमाउंट एडवांश में Trading Account में जमा होनी चाहिये तभी पूर्णरूप से इंट्राडे ट्रेडिंग कर सकते है

अब बात करते है डिलीवरी ट्रेडिंग की तो इसमें इंट्राडे ट्रेडिंग से थोडा अलग है इसमें अगर किसी क्लाइंट को शेयरों में खरीदारी करनी है तो उसे एक सिम्पल रूल फोलोअप करना है

इसमें भी खरीदने वाले शेयर पर सेबी ने कितने प्रतिशत मार्जिन नक्की किया है और क्लाइंट को कितने शेयर खरीदने है उसके हिसाबसे अमाउंट को Trading Account में जमा करवाना पड़ता है और बाकि का डेबिट खरीदिके तीसरे दिन क्लियर करना होंगा

शेयर मार्केट में हाल फिलहाल सिर्फ यह दो प्रकार की ही ट्रेडिंग होती है तो अगर आजके बाज़ार में किसीको इन्वेस्ट करना है

तो अनिवार्य रूपसे यह प्रोसेस अपनानी होंगी साथ ही 1 सितंबर 2020 से शेयर बाज़ार में लागु होने वाले नए नियम की पूरी लिस्ट निचे के Photos के माध्यम से बेहतर समझ पाएंगे

शेयर बाजार के नियम
शेयर बाजार के नियम

Stock Pledge Rules

सेबी के द्वारा लाये गए नये नियमों में सिर्फ शेयर मार्जिन ही नहीं शेयर प्लेजमेंट का नियम भी शामिल है हमने शेयर मार्जिन के बारेंमे सामान्य जानकारी हासिल कर ली है

सेबी के शेयर Pledge (गिरवी रखना) से जुडी अहम बाते

अब हम जानते है शेयर प्लेजमेंट के बारेंमे इसका हिन्दी अनुवाद ‘शेयर को गिरवी रखना’ होता है इसे और आशान भाषामे समजे तो शेयर प्लेजमेंट यानि सेबी के द्वारा दिया गया एक ऑप्शन है जिसके जरिये हम इस मार्जिन के बोज़ को थोडा कम कर सकते है

चलिए इसे थोडे और विस्तार से समजते है शेयर प्लेजमेंट का यह मतलब है की हमें आम तौर पर हमारे Demat Account में पड़े शेयर्स पर किसी प्रकार की कोई क्रेडिट नहीं मिलती हैं

मगर इस न्यू रूल्स के मुताबिक अबसे हमे इस पर भी मार्जिन मिलेंगा मगर यह सुविधा केवल इंट्राडे ट्रेडिंग में ही ज्यादा असरदार साबित होती है

मानलीजिये किसी क्लाइंट को रोजाना इंट्राडे ट्रेडिंग करने का सौख है और उसके Demat Account में लॉन्गटर्म इन्वेस्टमेंट की काफी अच्छी – अच्छी कंपनीयों के शेयर्स पड़े है

तो बजाय इसके की वो अपने Trading Account में बेफिजूल ज्यादा अमाउंट जमा रखे इसके बदले वो अपने Demat Account में पड़े कुछ शेयर्स को अपने ब्रोकर के जरिये प्लेज (गिरवी) करवा सकते है

शेयर प्लेजमेंट की सारी प्रोसेस ऑनलाइन होती है और बिलकुल सेफ होती है यह नियम शेयर के डिलीवरी ट्रेडिंग पर ज्यादा फायदेमंद नहीं है

क्योंकि अगर किसी निवेशक को लॉन्गटर्म इन्वेस्टमेंट के लिये शेयर खरीदने है फिर या तो उसे जिस शेयर को खरीदना है उसके मुताबिक मार्जिन को जमा करवाये या फिर फुल्ली पेमेंट करदे

एक बात का अवश्य ध्यान रखे की आपको कभी शोर्ट – मार्जिन ना देना पड़े हालांकि यह जुर्माना ब्रोकर और निवेशक दोनों पर लागु होता हैं

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Hello friends, currently I am working in the stock market operating as well as blogging through this wonderful website.

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